Breaking News
लगातार बारिश के चलते फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए बंद, प्रशासन ने सुरक्षा को दी प्राथमिकता
लगातार बारिश के चलते फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए बंद, प्रशासन ने सुरक्षा को दी प्राथमिकता
जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के संचालन को लेकर जिला प्रबंधन समिति की बैठक
जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के संचालन को लेकर जिला प्रबंधन समिति की बैठक
मुख्यमंत्री धामी ने शहीद ऊधम सिंह को दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री धामी ने शहीद ऊधम सिंह को दी श्रद्धांजलि
SDRF ने कांगड़ा घाट पर डूब रहे दो युवकों का किया सकुशल रेस्क्यू
SDRF ने कांगड़ा घाट पर डूब रहे दो युवकों का किया सकुशल रेस्क्यू
‘संत रविदास के विचार आज भी समाज को जोड़ने की प्रेरणा देते हैं’— ऋतु खण्डूडी भूषण
‘संत रविदास के विचार आज भी समाज को जोड़ने की प्रेरणा देते हैं’— ऋतु खण्डूडी भूषण
दून इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य दिनेश बर्त्वाल को मिला प्रिंसिपल एक्सीलेंस अवार्ड-2026
दून इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य दिनेश बर्त्वाल को मिला प्रिंसिपल एक्सीलेंस अवार्ड-2026
शिक्षिका सृष्टि की संदिग्ध मौत पर भड़कीं महिला आयोग की अध्यक्ष, दिए सख्त जांच के निर्देश
शिक्षिका सृष्टि की संदिग्ध मौत पर भड़कीं महिला आयोग की अध्यक्ष, दिए सख्त जांच के निर्देश
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026- 17 पदकों के साथ 10वें स्थान पर भारत
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026- 17 पदकों के साथ 10वें स्थान पर भारत
सुबह उठते ही होता है सिरदर्द? तो इसे हल्के में न लें, इन बीमारियों का हो सकता है संकेत
सुबह उठते ही होता है सिरदर्द? तो इसे हल्के में न लें, इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

UCC विधेयक पर लगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुहर, नियमावली बनते ही उत्तराखंड में होगा लागू

UCC विधेयक पर लगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुहर, नियमावली बनते ही उत्तराखंड में होगा लागू

नई दिल्ली। पिछले महीने उत्तराखंड विधानसभा में पारित विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ से मंजूरी दिए जाने के बाद उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) कानून बन गया है। यह कानून उत्तराखंड में विवाह, तलाक, संपत्ति की विरासत के लिए एक सामान्य कानून प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। यह कानून राज्य के अंदर या बाहर रहने वाले निवासियों के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाता है। लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे वैध माने जाएंगे। इसके अलावा, अपने लिव-इन पार्टनर की तरफ से छोड़ी गई महिलाएं भरण-पोषण की हकदार होंगी।

यह कानून मुसलमानों के एक वर्ग में प्रचलित बहुविवाह और ‘हलाला’ पर भी प्रतिबंध लगाता है। हालांकि, यह कानून आदिवासियों पर उनकी परंपराओं, प्रथाओं और अनुष्ठानों के संरक्षण के लिए लागू नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top