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7000 बीघा सरकारी जमीन पर घमासान, कांग्रेस ने धामी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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मुख्यमंत्री नाम से, प्रॉपर्टी डीलर काम से- करन माहरा

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की चार्जशीट कमेटी ने प्रदेश की सरकारी और बेशकीमती जमीनों के कथित प्रबंधन को लेकर धामी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। होटल इन्द्रलोक में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य की बहुमूल्य भूमि को निजी और कॉरपोरेट हितों के लिए इस्तेमाल कर रही है। पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा सहित कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में प्रदेश की बेशकीमती सरकारी भूमि को चुनिंदा लोगों और कंपनियों के हित में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर सरकारी संपत्तियों को कम कीमत पर निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे राज्य के हितों को नुकसान पहुंच रहा है।

चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड के माध्यम से करीब 7,000 बीघा सरकारी भूमि को निजी निवेशकों को दीर्घकालीन पट्टे पर देने की तैयारी की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिकों के लिए भूमि खरीद की सीमा निर्धारित है, तो चुनिंदा कॉरपोरेट कंपनियों को हजारों बीघा सरकारी जमीन लंबे समय के लिए देने का आधार क्या है।

माहरा के मुताबिक, सरकार ने उद्यान विभाग, आलू परियोजना, प्रजनन उद्यान सहित विभिन्न विभागों की खाली अथवा कम उपयोग वाली करीब 7,000 बीघा भूमि को चिह्नित कर भूमि बैंक तैयार किया है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित व्यवस्था में जमीन को 90 वर्ष तक की दीर्घकालीन लीज पर देने, होटल, रिसॉर्ट, विला, व्यावसायिक टाउनशिप, वेलनेस सेंटर और निजी स्कूल जैसी परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।

उन्होंने यह भी दावा किया कि लीज पर ली गई जमीन को आगे उप-पट्टे पर देने और बैंकों के पास बंधक रखकर ऋण लेने की अनुमति दिए जाने का प्रावधान है। कांग्रेस ने इन प्रावधानों को बड़े कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में बताया है। माहरा ने कंपनियों की पात्रता से जुड़ी शर्तों, भुगतान व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को लेकर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि व्यावसायिक उपयोग के लिए दी जाने वाली जमीन का लीज किराया कृषि भूमि के सर्किल रेट के आधार पर तय किया जा रहा है। उनका कहना था कि व्यावसायिक और कृषि भूमि की दरों में अंतर के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है और निजी कंपनियों को जमीन अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल सकती है।

माहरा ने इसे राज्य के भू-कानून की मूल भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि एक ओर आम लोगों के लिए भूमि खरीद पर सीमाएं निर्धारित की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े कॉरपोरेट समूहों को हजारों बीघा सरकारी जमीन लंबे समय के लिए देने की तैयारी है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में लीज की जमीन को स्थायी स्वामित्व में बदलने का रास्ता भी खुल सकता है। कांग्रेस ने मांग की कि ऐसी जमीनों पर स्थानीय युवाओं, ग्राम पंचायतों और सहकारी संस्थाओं के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट को लेकर भी उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर जल, जंगल और जमीन से जुड़े स्थानीय अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों को कॉरपोरेट घरानों के हित में इस्तेमाल करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

आर्य ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला उठाते हुए कहा कि एशियाई विकास बैंक के ऋण से करोड़ों रुपये खर्च कर वहां पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं विकसित की गईं। कांग्रेस का आरोप है कि करीब 142 एकड़ क्षेत्र और विकसित सुविधाओं को 15 वर्ष के लिए निजी कंपनी को लगभग एक करोड़ रुपये वार्षिक शुल्क पर दिया गया।

कांग्रेस ने इस प्रक्रिया में टेंडर और कंपनियों के बीच संभावित कारोबारी संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि क्या टेंडर प्रक्रिया में वास्तविक और स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हुई थी। इसके साथ ही कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों में शामिल कुछ इकाइयां बाद में विजेता कंपनी की हिस्सेदार कैसे बनीं और क्या इस पूरे घटनाक्रम की सरकार अथवा संबंधित अधिकारियों ने जांच कराई।

जॉर्ज एवरेस्ट जाने वाली सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली के विवाद का भी कांग्रेस ने उल्लेख किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा था। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली की स्थिति कैसे बनी और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई या नहीं।

अस्पताल के लिए जमीन आवंटन निरस्त करने पर सवाल

चार्जशीट कमेटी के सदस्य मनोज रावत ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े भूमि आवंटन के एक मामले को उठाते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग को विश्वास में लिए बिना बड़े अस्पताल के लिए प्रस्तावित जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया गया।

रावत के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे और अस्पताल निर्माण के लिए करीब 23,137 वर्गमीटर यानी लगभग 5.7 एकड़ भूमि चिन्हित की गई थी। उनका आरोप है कि 13 दिसंबर 2024 के घटनाक्रम के बाद 25 फरवरी 2025 को स्वास्थ्य विभाग को पूर्व सूचना या जानकारी दिए बिना भूमि आवंटन रद्द कर दिया गया।

कांग्रेस ने इस मामले में संबंधित कंपनियों की पात्रता और वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। रावत ने आरोप लगाया कि भूमि आवंटन और विकास प्रक्रिया से जुड़ी कुछ कंपनियों के पास रियल एस्टेट या बुनियादी ढांचा विकास का पर्याप्त अनुभव नहीं था।

उन्होंने सिक्का डेवलपर्स से जुड़े कथित वित्तीय मामलों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि कंपनी के खिलाफ नोएडा प्राधिकरण की ओर से बड़ी राशि की वसूली के आदेश जारी किए जा चुके हैं। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि कंपनी से जुड़े कुछ मामलों में देश के अन्य राज्यों में भी कानूनी विवाद सामने आए हैं।

रावत ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी रूप से अयोग्य ठहराए जाने के बावजूद संबंधित कंपनी वित्तीय बोली के चरण तक पहुंची और उसे भूमि का अनंतिम आवंटन भी किया गया। कांग्रेस ने इसे समानता के अधिकार और निविदा नियमों के विपरीत बताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की।

पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने कहा कि सरकारी भूमि से जुड़े सभी फैसलों में पारदर्शिता, सार्वजनिक हित और स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पार्टी ने सरकार से भूमि आवंटन, लीज की शर्तों, टेंडर प्रक्रिया और संबंधित कंपनियों की पात्रता से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी और अमरजीत सिंह भी मौजूद रहे।

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