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सांसद डा. नरेश बंसल ने संसद में उठाया अंग प्रत्यारोपण का मुद्दा

सांसद डा. नरेश बंसल ने संसद में उठाया अंग प्रत्यारोपण का मुद्दा

देहरादून/ नई दिल्ली: भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने संसद के शून्यकाल मे उत्तराखंड में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक “बहु-अंग प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सा विभाग (Department of Multiorgan Transplantation Surgery)” की स्थापना की का गंभीर विषय उठाया।

डा. नरेश बंसल ने कहा कि वर्तमान समय में अंग-विफलता एक सामान्य समस्या बनती जा रही है, तथा प्रत्यारोपण सेवाओं की माँग देश में उपलब्ध क्षमता से कहीं अधिक है।उत्तराखंड में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक “बहु-अंग प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सा विभाग(Department of Multiorgan Transplantation Surgery)” की स्थापना की जाए।

डा. नरेश बंसल ने कहा कि नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) के आँकड़ों के अनुसार, देश में प्रतिवर्ष 1.5 से 2 लाख गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, जबकि पिछले तीन वर्षों में पूरे देश में प्रतिवर्ष केवल 15 से 18 हजार प्रत्यारोपण ही हो पा रहे हैं। इसी प्रकार, देश को 50 हजार यकृत (लिवर) प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, परंतु प्रतिवर्ष लगभग 4 हजार ही किए जा रहे हैं। अन्य अंगों के प्रत्यारोपण में भी यही स्थिति है। इन सभी आवश्यकताओं के बीच, उत्तराखंड भी इन सेवाओं से लगभग अछूता है।

डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि यह सर्वविदित है कि भारत तेजी से डायबिटीज की राजधानी बनता जा रहा है। अनियंत्रित मधुमेह के उपचार में कई बार पैनक्रियास प्रत्यारोपण ही अंतिम और प्रभावी विकल्प होता है। इसी प्रकार आंत्र (इंटेस्टाइनल) प्रत्यारोपण की भी बढ़ती आवश्यकता महसूस की जा रही है।

डा. नरेश बंसल ने कहा कि हमारे देश में अंग दान की दर अत्यंत कम है—एक मिलियन जनसंख्या पर 1 से भी कम, और उत्तराखंड में यह दर लगभग नगण्य है। इसके विपरीत, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्य देश में मृतक अंग दान के प्रमुख योगदानकर्ता हैं।

भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, स्पेन अंग दान में विश्व में अग्रणी है। उसने वर्ष 2023 में 49.4 दाता प्रति मिलियन जनसंख्या (pmp) तथा 2024 में 52.6 pmp की दर प्राप्त की है। यह सफलता उनके अत्यंत सुविकसित “Spanish Model” के कारण संभव हुई है।

डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि इसलिए उत्तराखंड में बहु-अंग प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सा विभाग की स्थापना न केवल अंग-विफलता से पीड़ित रोगियों के लिए आवश्यक है, बल्कि उन दाताओं और उनके परिजनों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिन्होंने निस्वार्थ प्रेम और स्नेह से अंग दान का महान कार्य किया है।

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डा. नरेश बंसल ने कहा कि नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) के आँकड़ों के अनुसार, देश में प्रतिवर्ष 1.5 से 2 लाख गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, जबकि पिछले तीन वर्षों में पूरे देश में प्रतिवर्ष केवल 15 से 18 हजार प्रत्यारोपण ही हो पा रहे हैं। इसी प्रकार, देश को 50 हजार यकृत (लिवर) प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, परंतु प्रतिवर्ष लगभग 4 हजार ही किए जा रहे हैं। अन्य अंगों के प्रत्यारोपण में भी यही स्थिति है। इन सभी आवश्यकताओं के बीच, उत्तराखंड भी इन सेवाओं से लगभग अछूता है।

डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि यह सर्वविदित है कि भारत तेजी से डायबिटीज की राजधानी बनता जा रहा है। अनियंत्रित मधुमेह के उपचार में कई बार पैनक्रियास प्रत्यारोपण ही अंतिम और प्रभावी विकल्प होता है। इसी प्रकार आंत्र (इंटेस्टाइनल) प्रत्यारोपण की भी बढ़ती आवश्यकता महसूस की जा रही है।

डा. नरेश बंसल ने कहा कि हमारे देश में अंग दान की दर अत्यंत कम है—एक मिलियन जनसंख्या पर 1 से भी कम, और उत्तराखंड में यह दर लगभग नगण्य है। इसके विपरीत, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्य देश में मृतक अंग दान के प्रमुख योगदानकर्ता हैं।

भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, स्पेन अंग दान में विश्व में अग्रणी है। उसने वर्ष 2023 में 49.4 दाता प्रति मिलियन जनसंख्या (pmp) तथा 2024 में 52.6 pmp की दर प्राप्त की है। यह सफलता उनके अत्यंत सुविकसित “Spanish Model” के कारण संभव हुई है।

डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि इसलिए उत्तराखंड में बहु-अंग प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सा विभाग की स्थापना न केवल अंग-विफलता से पीड़ित रोगियों के लिए आवश्यक है, बल्कि उन दाताओं और उनके परिजनों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिन्होंने निस्वार्थ प्रेम और स्नेह से अंग दान का महान कार्य किया है।

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