Breaking News
बदलते शैक्षिक परिदृश्य में सकारात्मक दृष्टिकोण और नवाचार के साथ कार्य करें अधिकारी: अपर निदेशक गढ़वाल
बदलते शैक्षिक परिदृश्य में सकारात्मक दृष्टिकोण और नवाचार के साथ कार्य करें अधिकारी: अपर निदेशक गढ़वाल
बदलते शैक्षिक परिदृश्य में सकारात्मक दृष्टिकोण और नवाचार के साथ कार्य करें अधिकारी: अपर निदेशक गढ़वाल
बदलते शैक्षिक परिदृश्य में सकारात्मक दृष्टिकोण और नवाचार के साथ कार्य करें अधिकारी: अपर निदेशक गढ़वाल
पल्टन बाजार में सुबह 11 से शाम 7 बजे तक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित
पल्टन बाजार में सुबह 11 से शाम 7 बजे तक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित
पल्टन बाजार में सुबह 11 से शाम 7 बजे तक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित
पल्टन बाजार में सुबह 11 से शाम 7 बजे तक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित
इम्युनिटी मजबूत करने के लिए सिर्फ विटामिन C और D नहीं, इन पोषक तत्वों का सेवन भी है जरूरी
इम्युनिटी मजबूत करने के लिए सिर्फ विटामिन C और D नहीं, इन पोषक तत्वों का सेवन भी है जरूरी
पुतिन का यूरोप पर तीखा हमला, बोले- रूस को हराने का सपना छोड़ दें देश, यूक्रेन युद्ध पर बातचीत के संकेत
पुतिन का यूरोप पर तीखा हमला, बोले- रूस को हराने का सपना छोड़ दें देश, यूक्रेन युद्ध पर बातचीत के संकेत
भारत-जिम्बाब्वे महिला वनडे सीरीज का आगाज आज से, जानें कब और कहां देख सकेंगे लाइव मुकाबला
भारत-जिम्बाब्वे महिला वनडे सीरीज का आगाज आज से, जानें कब और कहां देख सकेंगे लाइव मुकाबला
बॉक्स ऑफिस पर ‘जेलर 2’ का जलवा बरकरार, ‘रणबाली’ की कमाई में आई गिरावट, जानें बाकी फिल्मों का हाल
बॉक्स ऑफिस पर ‘जेलर 2’ का जलवा बरकरार, ‘रणबाली’ की कमाई में आई गिरावट, जानें बाकी फिल्मों का हाल
उत्तराखंड में फिर बदलेगा मौसम, पहाड़ों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार
उत्तराखंड में फिर बदलेगा मौसम, पहाड़ों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार

बुजुर्गों ही नहीं, युवाओं और बच्चों में भी बढ़ रही सुनने की समस्या, जानिए इसके कारण

बुजुर्गों ही नहीं, युवाओं और बच्चों में भी बढ़ रही सुनने की समस्या, जानिए इसके कारण

आमतौर पर यह माना जाता है कि सुनने की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ कम होती है, लेकिन अब यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। हाल के वर्षों में युवाओं और बच्चों में भी कम सुनाई देने और बहरेपन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तेज आवाज में लंबे समय तक संगीत सुनना, कानों में संक्रमण, चोट, अधिक वैक्स जमा होना और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव भी सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या स्थायी बहरेपन में भी बदल सकती है।

बहरेपन के पीछे क्या हैं कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सुनने की क्षमता कम होने के कई कारण हो सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ कान के अंदर मौजूद संवेदनशील हिस्सों में धीरे-धीरे क्षति होने लगती है और रक्त संचार भी कम हो जाता है, जिससे सुनने में दिक्कत आती है। इसके अलावा तेज आवाज, जैसे डीजे या धमाके जैसी ध्वनियां कान के भीतर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कान में संक्रमण, खसरा जैसी बीमारियां और कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी सुनने की समस्या के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

समय पर इलाज न होने पर बढ़ सकती है परेशानी

स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग सुनने की क्षमता में कमी से जूझ रहे हैं। यदि कान की सामान्य समस्या का समय पर इलाज न कराया जाए तो यह स्थायी बहरेपन का कारण बन सकती है। कम सुनाई देने का असर केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। लंबे समय तक इस समस्या से जूझ रहे लोगों में अकेलापन और अवसाद जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार 85 डेसिबल से अधिक तेज आवाज में रहने से कान के अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां भी सुनने की क्षमता कम होने के जोखिम को बढ़ाती हैं।

क्या बहरेपन का इलाज संभव है?

डॉक्टरों का कहना है कि हर प्रकार का बहरापन स्थायी नहीं होता। यदि सुनने की समस्या कान में मैल जमा होने या संक्रमण की वजह से है तो सही इलाज और दवाओं से सुनने की क्षमता वापस आ सकती है। हालांकि यदि कान के अंदर की संवेदनशील कोशिकाएं स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, तो इसे पूरी तरह ठीक करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में हियरिंग एड जैसे उपकरण मरीजों की मदद करते हैं।

नवजात शिशुओं में यदि सुनने की समस्या का समय रहते पता चल जाए तो कुछ मामलों में उपचार के जरिए स्थिति में सुधार संभव होता है।

जीन थेरेपी से नई उम्मीद

हाल के वर्षों में वैज्ञानिक शोधों ने बहरेपन के इलाज की दिशा में नई उम्मीदें भी जगाई हैं। वर्ष 2025 में स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में जीन थेरेपी के जरिए जन्मजात बहरेपन के इलाज की संभावना सामने आई। अध्ययन में शामिल कुछ मरीजों में एक विशेष इंजेक्शन के बाद सुनने की क्षमता में सुधार देखा गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने से पहले अभी और बड़े स्तर पर परीक्षण की जरूरत है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top