Breaking News
मुख्यमंत्री ने भारी वर्षा को देखते हुए दिए हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने भारी वर्षा को देखते हुए दिए हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश
देहरादून-मसूरी के नियोजित विकास पर बड़ा फैसला, एमडीडीए ने 25 प्रस्ताव किए स्वीकृत
देहरादून-मसूरी के नियोजित विकास पर बड़ा फैसला, एमडीडीए ने 25 प्रस्ताव किए स्वीकृत
एसएसपी श्वेता चौबे ने थाना छाम का किया आकस्मिक निरीक्षण, महिला सुरक्षा और जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण पर दिया जोर
एसएसपी श्वेता चौबे ने थाना छाम का किया आकस्मिक निरीक्षण, महिला सुरक्षा और जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण पर दिया जोर
बुजुर्ग-दिव्यांगों के घर जाएंगे बीएलओ, करेंगे नोटिसों का निस्तारण- सीईओ
बुजुर्ग-दिव्यांगों के घर जाएंगे बीएलओ, करेंगे नोटिसों का निस्तारण- सीईओ
डॉ. पंकज गर्ग एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया के निदेशक (शिक्षा), उत्तर क्षेत्र निर्वाचित
डॉ. पंकज गर्ग एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया के निदेशक (शिक्षा), उत्तर क्षेत्र निर्वाचित
सहकारिता में हरियाणा व उत्तराखंड मिलकर करेंगे कामः डाॅ. धन सिंह रावत
सहकारिता में हरियाणा व उत्तराखंड मिलकर करेंगे कामः डाॅ. धन सिंह रावत
जनसुनवाई में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सुनीं लोगों की समस्याएं, युवा किसान की सफलता को बताया प्रेरणादायक
जनसुनवाई में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सुनीं लोगों की समस्याएं, युवा किसान की सफलता को बताया प्रेरणादायक
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लिया राजनैतिक दलों से SIR पर फीडबैक
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लिया राजनैतिक दलों से SIR पर फीडबैक
सुरक्षा, सेवा और समर्पण का संगम—SDRF ने शंकराचार्य चौक पर लगाया निःशुल्क चिकित्सा शिविर
सुरक्षा, सेवा और समर्पण का संगम—SDRF ने शंकराचार्य चौक पर लगाया निःशुल्क चिकित्सा शिविर

उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर ईको सेंसिटिव जोन के बावजूद अंधाधुंध निर्माण, आपदा का बढ़ रहा खतरा

उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर ईको सेंसिटिव जोन के बावजूद अंधाधुंध निर्माण, आपदा का बढ़ रहा खतरा

उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के अहम मार्ग उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से गंगोत्री धाम तक का 100 किलोमीटर क्षेत्र वर्ष 2013 में ईको सेंसिटिव जोन (Eco Sensitive Zone) घोषित किया गया था। नियम के अनुसार, भागीरथी नदी और उसकी सहायक नदियों के दोनों ओर 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण वर्जित है। लेकिन हकीकत यह है कि इस पूरे क्षेत्र में लगातार अंधाधुंध निर्माण हो रहे हैं।

मानसून में बढ़ता खतरा

मानसून सीजन में नदियों का जलस्तर बढ़ते ही इन अवैध निर्माणों पर आपदा का खतरा मंडराने लगता है। बावजूद इसके, प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नदियों के किनारे बने होटल, रिजॉर्ट और आश्रम हर साल आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के दौरान सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं।

स्थानीय विरोध और न्यायालय की सख्ती

जब 2013 में इस क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था, उस समय स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था। लेकिन इसके बावजूद इसे लागू कर दिया गया। इसके बाद भी नदियों के किनारे नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी रहा।

धराली और हर्षिल क्षेत्र में आई आपदाओं के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग से इस मामले पर जवाब मांगा था। अदालत ने साफ कहा था कि ईको सेंसिटिव जोन के नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

नियमों की अनदेखी

नियमों के मुताबिक भागीरथी नदी से 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं होना चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि हर्षिल से लेकर उत्तरकाशी मुख्यालय तक कई स्थानों पर 50 मीटर से भी कम दूरी पर निर्माण कार्य देखे जा सकते हैं। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है बल्कि उत्तरकाशी जैसे भूकंप व आपदा संवेदनशील जिले में जोखिम लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में हो रहे अनियंत्रित निर्माणों से न केवल नदियों के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ रहा है, बल्कि यह भविष्य में बड़े पैमाने पर आपदाओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को तुरंत ऐसे निर्माणों पर रोक लगानी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top