Breaking News
उत्तराखंड में बढ़ी वनाग्नि की घटनाएं, फायर सीजन में अब तक 73 मामले दर्ज
उत्तराखंड में बढ़ी वनाग्नि की घटनाएं, फायर सीजन में अब तक 73 मामले दर्ज
मुख्यमंत्री धामी ने सपरिवार मनाया लोकपर्व फूलदेई, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री धामी ने सपरिवार मनाया लोकपर्व फूलदेई, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं
एफआईएच महिला विश्व कप क्वालिफायर- इटली को हराकर भारत पहुंचा फाइनल में
एफआईएच महिला विश्व कप क्वालिफायर- इटली को हराकर भारत पहुंचा फाइनल में
राम गोपाल वर्मा ने किया ‘सरकार 4’ का ऐलान, जल्द शुरू होगी फिल्म की शूटिंग
राम गोपाल वर्मा ने किया ‘सरकार 4’ का ऐलान, जल्द शुरू होगी फिल्म की शूटिंग
योग वह दिव्य चेतना है, जिसने पूरे विश्व को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा दी- सीएम धामी
योग वह दिव्य चेतना है, जिसने पूरे विश्व को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा दी- सीएम धामी
ऋषिकेश में आरवीएनएल परियोजना स्थल देखने पहुँचा ओडिशा का मीडिया प्रतिनिधिमंडल
ऋषिकेश में आरवीएनएल परियोजना स्थल देखने पहुँचा ओडिशा का मीडिया प्रतिनिधिमंडल
भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष व सांसद डा. नरेश बंसल ने सदन मे स्वदेश दर्शन के अंतर्गत परियोजनाएं संबंधित प्रश्न किया
भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष व सांसद डा. नरेश बंसल ने सदन मे स्वदेश दर्शन के अंतर्गत परियोजनाएं संबंधित प्रश्न किया
गणेशपुर में 30 बीघा की अवैध प्लॉटिंग पर चला एमडीडीए का बुलडोजर
गणेशपुर में 30 बीघा की अवैध प्लॉटिंग पर चला एमडीडीए का बुलडोजर
20 मार्च तक जनपद की सभी सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूर्ण करें- जिलाधिकारी20 मार्च तक जनपद की सभी सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूर्ण करें- जिलाधिकारी
20 मार्च तक जनपद की सभी सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूर्ण करें- जिलाधिकारी20 मार्च तक जनपद की सभी सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूर्ण करें- जिलाधिकारी

रेल की यात्रा डरावनी

रेल की यात्रा डरावनी

एक बार फिर रेल हादसे ने देशभर में यात्रियों के लिए चिंता पैदा की है। उत्तर प्रदेश के गोंडा में चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की 15 बोगियां बेपटरी हो जाने की घटना में वैसे तो 3 यात्रियों की जान गई, मगर इसने रेलवे की व्यवस्था में व्याप्त कमियों और लापरवाहियों को जरूर जिंदा कर दिया है।

हालांकि, हादसा मानवीय भूल की वजह से हुआ है या इसके पीछे कोई साजिश है-जैसा कि इंजन के ड्राइवर ने कहा कि हादसे के पहले जोर का विस्फोट हुआ था-यह तो जांच के बाद ही मालूम चल पाएगी, किंतु हाल के वर्षो में रेल की यात्रा थोड़ी डरावनी जरूर हो गई है।
इससे पहले पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी जिसमें 9 यात्रियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था और 40 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। देश में पहले भी रेल हादसे हुए हैं और कइयों की जान गई है, मगर हाल के वर्षो में दुर्घटना का स्वरूप बदल गया है।

नि:संदेह मोदी सरकार के 10 वर्षो के दौरान रेलवे ने तरक्की की नई इबारत लिखी है, किंतु कई मामलों में अब भी रेल महकमे में सुधार की जरूरत है। खासकर संरक्षा और सुरक्षा के मसले पर सरकार को ज्यादा गंभीर और संवेदनशील होना पड़ेगा। स्वचालित सिगनलिंग प्रणाली भी सवालों के घेरे में है। इसके अलावा पायलट और लोको पायलटों को मिलने वाली सुविधा अपर्याप्त है। उन्हें आराम नहीं मिल पाता है और इंजन में भी उनके लिए सामान्य सुविधा तक की कमी दिखती है।

इसी तरह संचालन प्रबंधन में कई तरह की खामियां और कमी के अलावा महत्त्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों की कमी और कवच प्रणाली को लागू नहीं करने के फैसले से मुंह नहीं चुराया जा सकता है। वैसे भी जब ऐसे हादसे होते हैं तो इसका खामियाजा यात्रियों की जान जाने के अलावा रेलवे की संपत्ति को हुए नुकसान से भी जोडक़र देखने की जरूरत है।

सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय रेल में संरक्षा श्रेणी के स्वीकृत कुल करीब 10 लाख पदों में से डेढ़ लाख से अधिक पद खाली हैं। हालांकि रेलवे ने पिछले 10 वर्षों में इस मामले में महत्त्वपूर्ण निवेश करने के साथ कई संरचनात्मक और प्रणालीगत सुधार भी किए हैं, जिनका सुरक्षित परिचालन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके बावजूद अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। फिलहाल तो जांच कमिटी की रिपोर्ट आने का इंतजार किया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top