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दिल्ली का मालिक कौन?

दिल्ली का मालिक कौन?

अजय दीक्षित
पिछले दिनों ओल्ड राजेन्द्र नगर में रात आई.ए.एस. कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने पर तीन छात्र-छात्राओं की मौत हो गई । बेसमेंट की परमिशन कबाड़ रखने के लिए ली गई थी । परन्तु वहां लाइब्रेरी चल रही है । रात सवा नौ बजे का वाकया है । पानी इतनी तेजी से बहा कि बच्चे अंधेरे में निकल ही नहीं पाये । अब कई बेसमेंट को सील कर दिया गया है, दिल्ली पुलिस की बहादुरी देखो कि उसने एक ड्राइवर को पकड़ लिया कि उसने ट्रक तेजी से चलाया था जिससे पानी बेसमेंट में भरा । दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस के इस एक्शन पर आश्चर्य प्रकट किया और तंज कसा कि पुलिस ने पानी को आरोपी नहीं बनाया । अब कई राज्यों में बेसमेंट की पड़ताल की जा रही है । मुरैना में भी कई बेसमेंट सील किये गये हैं । असल में बेसमेंट पार्किंग के लिए होते हैं, पर उन में बैंक, सेटल, दुकानें चल रही हैं।

दिल्ली की इस घटना के बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है । भाजपा आप पार्टी को दोषी मानती है । एम.सी.डी. भी आजकल आप पार्टी के पास है यद्यपि एक साल पहले पिछले पन्द्रह सालों तक एम.सी.डी. में भाजपा का कब्जा था ।

देश में 28 राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश हैं । 2024 के चुनाव से पहले 14 राज्यों में भाजपा की सरकार थी । सन् 2024 में भाजपा द्वारा उड़ीसा जीतने पर अब 15 राज्यों में भाजपा की सरकार है यद्यपि महाराष्ट्र और बिहार में मुख्यमंत्री भाजपा का नहीं है । उनके उप मुख्यमंत्री भाजपा से हैं । यूं भाजपा और कई राज्यों में अपनी सरकार ही मानती है।

जैसे सिक्किम, नागालैण्ड, मेघालय आदि । मेघालय में संगमा के विरुद्ध गृहमंत्री के वक्तव्य टी.वी. चैनलों के पास अभी भी होंगे । चुनाव जीतने के बाद संगमा के शपथ ग्रहण में स्वयं प्रधानमंत्री उपस्थित रहे । 8 केन्द्र शासित प्रदेशों में केवल पांडिचेरी और दिल्ली में चुनी हुई सरकारें हैं । परन्तु क्यों कि दिल्ली देश की राजधानी भी है, यहां असली अधिकार एल.जी. के पास है, सिद्धांतत: लैण्ड लॉ एण्ड ऑर्डर और पुलिस को छोडक़र सभी कुछ चुनी हुई सरकार के पास हैं, कागन पट, परन्तु वास्तविक स्थिति यह है कि चुनी हुई सरकार अधिकारियों की पोस्टिंग, उनकी जवाबदेही और उन पर करवाई नहीं कर सकती । सन् 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार चुनी हुई सरकार को सौंप दिया था । परन्तु केन्द्र की सरकार ने अध्यादेश निकालकर यह अधिकार एल.पी.जी. को सौंप दिया । इस प्रकार सिद्धांतत: केन्द्रीय गृह मंत्रालय के ही सब अधिकार हैं ।

असल में या तो चुनी हुई सरकार के पास अधिकार होना चाहिए अन्यथा इस भारी भरकम व्यवस्था का क्या फयदा जहां मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, विधायकों को आवास व भत्ते व वेतन मिल रहा है । यह टेक्स पेयर पर अनावश्यक बोझ है । दिल्ली की चुनी हुई सरकार कोई फैसला स्वयं नहीं ले सकती । उसे एल.जी. से मंजूरी लेनी पड़ती है ।

जब अधिकारियों पर नियंत्रण एल.जी. यानि केन्द्रीय गृह मंत्रालय के पास है तो फिर दिल्ली के बेसमेंट में हुए हादसे की जिम्मेदारी से वे कैसे बच सकते हैं । असल में देश में पक्ष और विपक्ष अपने को एक दूसरे का दुश्मन समझते हैं । विदेशों में पक्ष और विपक्ष के सांसद एक ही बार में सफर करते हैं । दोनों का उद्देश्य देश सेवा है केवल उनके रास्ते अलग-अलग हैं । भारत में स्थिति कैसे सुधरेगी, इस पर अब सारा दारोमदार वोटर पर है । आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी, स्त्रियों पर हो रहे अत्याचार और भ्रष्टाचार से परेशान है । हम राम का नाम लेते हैं । उन्हीं के नाम पर दोनों पक्ष समझौता कर लें और मिलकर आम जनता की समस्या का समाधान करें ।

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